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किस्सा अंग्रेजो के खिलाफ भाषण देना दिलीप कुमार को पड़ा था भारी, खानी पड़ी थी जेल की हवा….

आज हम आपसे बॉलीवुड फिल्मी दुनिया की ऐसी शख्सियत जो किसी पहचान की मोहताज नहीं वह बॉलीवुड  फिल्मी दुनिया के मशहूर अभिनेता जिनके अभिनय ने पूरे बॉलीवुड पर राज किया है, और उन जैसा अभीनेता ना आज तक कोई आया है और ना ही कोई आएगा जी हां हम बात कर रहे हैं दिलीप कुमार साहब की.दिलीप कुमार साहब ने अपनी एक्टिंग से फिल्मी दुनिया में वह जान पिरोही थी कि उसको आज भी उनके फैंस याद करते हैं.दिलीप साहब ने जितनी भी फिल्मों में अभिनय किया उसको  इस तरह निभाते थे कि करैक्टर में डूब जाया करते थे.

हमारे बॉलीवुड फिल्मी दुनिया के इस महान कलाकार दिलीप कुमार जी ने 7:30 बजे बुधवार के दिन अलविदा कह दिया मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली.एक्टर दिलीप साहब को सांताक्रुज कब्रिस्तान में सुपुर्द, ए, खाक किया गया.उनके निधन से पूरे हमारे भारत देश में उनके चाहने वाले उनके फैंस पाकिस्तान, नेपाल,बांग्लादेश सभी जगह शोक की लहर फैल गई दुनिया भर में उनके फैन्स दुखी होगए.

दिलीप कुमार साहब ने अपने फिल्मी कैरियर  में एक से एक शानदार किरदार निभाया है और हिट फिल्में कि उन्होंने अपने करियर में केवल 62 फिल्में ही की. और यह सभी फिल्में एक से एक बढ़कर दिलीप कुमार साहब कीअदाकारी का ऐसा किरदार निभाया जिसमें रियलिस्टिक बनाने के लिए उन्होंने जान डाल दी. फिल्मी करियर शुरू करने से पहले दिलीप कुमार साहब पुणे के एक आर्मी क्लब में सैंडविच स्टॉल पर काम किया करते थे.अपनी पहली नौकरी के महंताने के तौर पर उन्हें उस समय में केवल ₹36 ही मिला करते थे. इसके बाद दिलीप कुमार साहब ने अपना फिल्मी कैरियर बनाने की मन में ठान ली.

मोहम्मद यूसुफ खान दिलीप कुमार साहब का असली नाम था. उन्होंने बॉलीवुड फिल्मी दुनिया में काफी नाम कमाया।उनके फिल्मी करियर से जुड़ी एक ऐसी बात है जो शायद ही कम लोग जानते हैं जो आज हम आपको बताएंगे. अपने दिल में करार के चलते आजादी से पहले दिलीप कुमार साहब जेल भी जा चुके हैं उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ एक भाषण दे दिया था जिस कारण उनको जेल भी जाना पड़ा था.

इस बात के बारे में दिलीप कुमार जी ने अपनी ऑटो बायोग्राफी द सब्सटेंस एंड द शैडो में जिक्र किया था यह आजादी से पहले की बात है जब दिलीप कुमार को अपने पिता की मदद करने के लिए उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़ कर एक नौकरी करनी पड़ी थी . पुणे में मिलिट्री कांट्रेक्टर क्लब में बतौर मैनेजर नौकरी शुरू की थी.उनके सैंडविच सभी को बहुत पसंद आते थे वह इसके लिए बहुत ज्यादा फेमस भी हो गए थे.यह बात जब उन्होंने अपने एक साथी के कहने पर भारत की तारीफ में भाषण दिया था. इस भाषण में उन्होंने भारत को मेहंनती सच्चे और अहिंसक लोगों का देश कहा था और बताया था कि हमारा देश कैसे श्रेष्ठ है.एक्टर दिलीप कुमार साहब ने अपनी किताब में लिखा था मेरे स्पीच की तारीफ की गई, मैं खुशी से फूला नहीं समा रहा था. लेकिन यह कुछ ही देर की थी मैं उस वक्त दंग रह गया जब पुलिस अफसर आए और वह मुझे हथकड़ी लगाकर ले गए.उन्होंने बताया कि मेरी ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सोच के लिए गिरफ्तार किया जा रहा है।अंग्रेजों के विरोध में भाषण देने की वजह से दिलीप कुमार को यह येरवाड़ा जेल भेज दिया गया था उस समय वहां कई सत्याग्रही भी जेल में बंद थे. दिलीप कुमार ने अपनी किताब में बताया था कि उस समय  सत्याग्रहयो को गांधी वाले कहा जाता था।दूसरे कैदियों का सपोर्ट  करते हुए उन्होंने भी भूख हड़ताल कर दी थी.अगले दिन दिलीप कुमार को जेल से जोड़ दिया गया था उन्होंने बताया कि अगले दिन जब  उनकी पहचान के मेजर आए तो उन्होंने जेल से उनको छोड़ दिया और तबसे वह भी गांधी वाला बन गए.

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