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जब एयरपोर्ट पर सुरक्षाकर्मी को देखकर सैल्यूट करने लगा क्यूट बच्चा, VIDEO जीत लेगा दिल

अपने लोगों की हिफाजत के लिए हमारे फौजी हर वक्त तैनात रहते हैं.चाहे कोई भी मौसम हो,चाहे कोई भी परिस्थिति हो ये लोग हर वक्त मुस्तैदी से नापाक इरादों वालों से निपटने के लिए तैयार रहते हैं.हिंदुस्तान के लोगों का अपने इन जवानों के प्रति क्या इज्जत होती है ये वीडियो बता रहा है.जो बच्चा अभी ठीक से चलना ही सीखा है वो इन जवानों को देखकर सैल्यूट कर रहा है.

केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने 28 सेकंड का ये वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है.इस वीडियो को देखकर आप भी कुछ पलों के लिए इमोशनल हो जाएंगे.एक छोटा सा बच्चा अपने पैरेंट्स के साथ कहीं जा रहा हो और वहीं पर उसको सेना के जवान सुरक्षा में तैनात दिख जाएं तो वो क्या रिएक्ट करेगा.ऐसा ही एक वीडियो बेंगलुरु एयरपोर्ट से सामने आया है.सोशल मीडिया पर ये वीडियो काफी पसंद किया जा रहा है लोग इस बच्चे को सैल्यूट कर रहे हैं.

ये वीडियो बेंगलुरू एयरपोर्ट का बताया जा रहा हैं.एयरपोर्ट के बाहर केंद्रीय सुरक्षाबल तैनात रहता है.वहीं पर अपने वाहन में सुरक्षाबल मुस्तैदी से तैनात हैं.तभी एक छोटा सा बच्चा अपने पैरेंट्स के साथ वहां पर आता है.वो एक नजर उस सुरक्षाबल के वाहन को देखता और फिर खड़ा होकर फौजी को सैल्यूट कर रहा है.एक नजर के लिए लगता है ये दृश्य यहीं पर रुक जाए.मासूम के हाथ माथे पर भी ठीक से लग नहीं रहे थे

मगर वो दिल से सैल्यूट कर रहा था.उसके बाद फौजी ने भी उस बच्चे को सैल्यूट किया.और दोनों एक दूसरे को सैल्यूट करते रुक गए.इसके बाद बच्चा अपने पिता के साथ अंदर की ओर चला जाता है मगर उन फौजियों के निगाहें उसी पर टिकी होती हैं.भारत के पास पुराने सैन्य जहाज हैं जो अक्सर दुर्घटना के शिकार होते रहते हैं. पिछले साल फ़रवरी में जारी डेटा के अनुसार उससे पहले के चार सालों में 39 प्लेन क्रैश हुए हैं.पिछले साल सितंबर महीने में दो मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हुए थे.

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड से 80 मिसाइल सिस्टम मिले जिनमें से 30 फ़ीसदी आकाश मिसाइल सिस्टम बुनियादी परीक्षण में ही नाकाम रहे.रिपोर्ट में कहा गया है कि मिसाइल लक्ष्य तक पहुंचने में नाकाम रही और उसकी गति भी कम थी. दो मिसाइल तो बूस्टर नोज़ल के कारण जहां थीं वहीं पड़ी रहीं.मार्च 2017 की सीएजी की इस रिपोर्ट पर भारतीय वायु सेना ने कहा था कि असफ़ल मिसाइलों को बदलने का काम जारी है.सीएजी ने इस बात को भी रेखांकित किया था कि भारत सरकार ने 2016 में आकाश मिसाइल को भारत-चीन सीमा पर तैनात करने की घोषणा की थी, लेकिन एक जगह भी इसे स्थापित करने में कामयाबी नहीं मिली.

इस रिपोर्ट के अनुसार इन मिसाइलों की नाकामी अंतरराष्ट्रीय मानकों से कहीं ज़्यादा है,भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और हथियारों के आयात कम करने की दिशा में प्रधानमंत्री मोदी की मेक इन इंडिया योजना के लिए सीएजी रिपोर्ट किसी झटके से कम नहीं थी.इतना कुछ होने के बावजूद भारत के आर्मी प्रमुख बिपिन रावत कई बार कह चुके हैं भारतीय सेना ढाई मोर्चों पर एक साथ लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

सेना प्रमुख के इस बयान पर देश के भीतर ही मखौल उड़ाया गया कि वो किस आधार पर ढाई मोर्चों पर एक साथ युद्ध के लिए तैयार होने की बात कर रहे हैं.सीएजी ने यहां तक कहा था कि भारतीय सेना के पास 10 दिनों तक लड़ने के लिए ही गोला-बारूद है. शायद चीन ने भी सीएजी की रिपोर्ट का अध्ययन किया ही होगा.डोकलाम गतिरोध के दौरान चीन लगातार कहता रहा कि भारतीय सेना पीछे हट जाए नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.जेएनयू में साउथ एशियन स्टडी सेंटर की प्रोफ़ेसर सबिता पांडे कहती हैं कि किसी भी देश के लिए दो मोर्चे पर युद्ध लड़ना इतना आसान नहीं होता है.

उन्होंने कहा, “एक ताक़तवर देश के लिए दो मोर्चों पर एक साथ युद्ध लड़ना मुश्किल होता है.”एक तरफ़ भारतीय आर्मी प्रमुख का यह कहना और दूसरी तरफ़ युद्ध तैयारियों में भारी कमी के बीच रक्षा बजट में आवंटित राशि पर भी बहस हो रही है कि भारत इस बजट के साथ चीन और पाकिस्तान से एक साथ मुक़ाबला कैसे कर पाएगा?पिछले वित्तीय वर्ष में कुल बजट की 12.22 फ़ीसदी राशि रक्षा क्षेत्र पर आवंटित की गई जो कि बीते दो दशकों में कुल बजट का सबसे कम हिस्सा था.

1988 में रक्षा क्षेत्र पर जीडीपी का 3.18 फ़ीसदी राशि आवंटित की गई, लेकिन उसके बाद से लगातार गिरावट देखने को मिली है.पिछले बजट में भारत की कुल जीडीपी का 1.6 फ़ीसदी हिस्सा रक्षा पर खर्च करने के लिए आवंटित किया गया था जबकि वैश्विक स्तर यह मानक दो से 2.25 फ़ीसदी है.भारत की तुलना में चीन ने अपनी जीडीपी का 2.1 फ़ीसदी हिस्सा रक्षा पर खर्च करने के लिए आवंटित किया तो पाकिस्तान ने 2.36 फ़ीसदी.इंस्टिट्यूट फोर डिफेंस स्टडीज एंड एनलिसिस के लक्ष्मण कुमार बेहरा ने अपने कई इंटरव्यू में कहा है

कि आर्मी के आधुनिकीकरण के लिए आवंटन राशि में 0.9 प्रतिशत की कमी आई है. वहीं नेवी और एयर फ़ोर्स में यह कमी 12 फ़ीसदी और 6.4 फ़ीसदी है.ऐसा तब देखने को मिल रहा है जब भारतीय सेना लड़ाकू विमान, राइफल्स, हथियार, बुलेट-प्रूफ जैकेट्स, होवित्जर, मिसाइल्स, हेलिकॉप्टर्स और युद्धपोतों की कमी की गहरी समस्या से जूझ रही है.द डिप्लोमैट की रिपोर्ट कहती है, “सैन्य ताक़त के मामले में चीन भारत से काफ़ी आगे है. चीन की सैन्य क्षमता के सामने भारत कहीं नहीं टिकता है. चीन के पास भारत की तुलना में दस लाख ज़्यादा सैनिक हैं.पांच गुना ज़्यादा पनडुब्बियां और टैंक्स हैं,”लड़ाकू विमान भी भारत से दोगुने से अधिक हैं और युद्धपोत भी लगभग दोगुने हैं. भारत के मुक़ाबले चीन के पास तीन गुना से ज़्यादा परमाणु हथियार हैं. वहीं चीन का रक्षा बजट 152 अरब डॉलर है तो भारत का महज 51 अरब डॉलर ही है.”इस बार के बजट को लेकर भी कहा जा रहा है.

कि अर्थव्यवस्था की सेहत ठीक नहीं होने की वजह से सरकार रक्षा बजट पर ज़्यादा खर्च करने की स्थिति में नहीं है.ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत रक्षा बजट पर जितनी रक़म आवंटित करता है उसका 80 फ़ीसदी से ज़्यादा हिस्सा रक्षा कर्मियों के वेतन और अन्य भत्तों पर खर्च हो जाता है.ऐसे में आधुनिकीकरण के लिए बहुत कम फंड बचता है. इसके बावजूद पिछले साल रक्षा बजट की 6,886 करोड़ रक़म आर्मी इस्तेमाल नहीं कर पाई थी.मोदी सरकार में रक्षा मंत्री रहे मनोहर पर्रिकर ने आर्मी में सुधारों को अंजाम देने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल शेकटकर की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी.इस समिति की 99 सिफ़ारिशों में से सरकार ने 65 को 2019 तक लागू करने के लिए कहा है.इस कमिटी ने सेना में संख्या बल घटाने और खर्चों में कटौती करने की सिफारिश की है. अभी भारतीय सेना में क़रीब 14 लाख संख्या बल है.

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