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नीरज चोपड़ा को सरपंच कहकर मजाक उड़ाते थे लड़के,मलाई बूरा खाकर 12 साल की उम्र में 85 किलो हो गया था वज़न……

ओलंपिक में अपना नाम रोशन करने वाले सुवण अक्षरों में अपना नाम अंकित कराने वाले नीरज चोपड़ा जिनका नाम आज गौरव का एहसास कराता है.भारतीय गौरवमई खिलाड़ी नीरज ने वह कमाल कर दिखाया जिससे भारत का नाम ऊंचा कर दिया. नीरज ने अपने अच्छे प्रदर्शन के चलते भारत को स्वर्ण पदक जिताने का जो काम की कर दिखाया है, अपनी प्रतिभा दिखाई है उससे सभी भारतवासी बहुत ज्यादा प्रसन्न है नीरज ने पूरे भारत का नाम रोशन कर दिया है.

नीरज चोपड़ा ने भारत का नाम रोशन करते हुए टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर अपना नाम इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में अंकित करा दिया है.13 साल बाद पहला गोल्ड मेडल भारत की झोली में आ गया.नीरज चोपड़ा के जीवन से जुड़ी हम आपको कुछ बातें बताने जा रहे हैं जब नीरज का वजन काफी ज्यादा बढ़ गया था.तब उनके वजन बढ़ जाने के कारण गांव के लड़के सरपंच कहकर उनका मजाक उड़ाते थे.इसके साथ ही उनके पिता ने उन्हें जिम भेजना शुरू किया.नीरज जब केवल 12 वर्ष के ही थे तब मलाई बूरा शक्कर खाने की वजह से उनका वजन 85 किलो तक हो गया था ऐसे में वह कुर्ता पहन कर बाहर निकलते थे तो गांव के लड़के गांव का सरपंच कहकर उनका मजाक उड़ाया करते थे उन्हें चिढ़ाते थे.

सपने को पूरा करने के लिए छोड़ दिया था मीठा….

जब नीरज सबसे छोटे होने के कारण जिम में  जाने से मना कर दिया गया था. इसके बाद उन्होंने खेल मैदान में कदम रखा और कोच जयवीर सिंह ने उनके अंदर की प्रतिभा टैलेंट को पहचान लिया.बिना ट्रेनिंग के ही नीरज 40 मीटर तक जैवलिन फेंक रहे थे. इसके बाद नीरज का एक नया जिंदगी का सफर शुरू हुआ.

नीरज चोपड़ा ने अपने इस सपने को पूरा करने के लिए मीठा जो उन्हें बहुत पसंद था उसको खाना छोड़ दिया.ओलंपिक में इतिहास रचने के बाद अब नीरज की मां का कहना है कि वह अपने बेटे को जी भर कर बूरा शक्कर खिलाएंगी.

नीरज ने सबसे पहले भाला फेंकने की कला पानीपत के कोच -जय वीर सिंह से सीखी थी. इसके बाद पंचकूला में उन्होंने 2011 से 2016 की शुरुआत तक ट्रेनिंग ली लेकिन नीरज सिर्फ भाला ही नहीं फेंकते थे बल्कि लंबी दूरी के धावकों के साथ दौड़ते भी थे.

 

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