कुछ हटकर

भारत में मौजूद है दुनिया का एक अनोखा गाँव जहा हर कोई है अमीर,बेंको में जमा है लोगो के 7000 करोड़

भारत गांव का देश है और करीब 6.50 लाख गांव में ही भारत की आत्मा बसती है.अगर आप भी गांव के बारे में सुनते ही कच्चे रास्ते, कीचड़ से भरी गलियां, कच्चे नाले, हैंडपंप चलाते हुए लोग या खेतों में काम करते हुए मजदूर वाली छवि बना लेते हैं तो अब आपको अपना नजरिया बदलने की जरूरत है.देश के गांव समृद्धि के नए रास्ते पर चल पड़े हैं और दुनिया का सबसे अमीर गांव भारत के गुजरात में ही स्थित है.1990 के दशक में जब तकनीक का ज़माना आया तो माधापार देश के सबसे पहले हाइटेक गांव की शक्ल ले चुका था.पूरे गुजरात ने ही पिछले दो दशक में ख़ूब विकास किया है, लेकिन कच्छ इलाके के इस गांव की ख़ासियत अच्छे होटल, समझदार लोग, तकनीक का प्रभाव आदि थे.इस वजह से बड़ी-बड़ी मीटिंग कराने के लिए बेस्ट जगह गुजरात का माधापार गांव बन गया.

इस गांव की खुद की वेबसाइट भी है तो गांव का अपना गीत भी है.गांव वाले बताते हैं कि ब्रिटेन में उनके गांव के कम से कम 1500 परिवार, कनाडा में 200 अमेरिका में 300 से ज्यादा परिवार रहते हैं.गांव वालों के अनुसार कम से कम 5 परिवार धर्मज के आज विदेशों में बसे हुए हैं.इसका हिसाब किताब रखने के लिए बकायदा एक डायरेक्टरी भी बनाई गई है, जिसमें कौन कब जाकर विदेश बसा उसका पूरा लेखा जोखा है.

गुजरात के कच्छ जिले में स्थित मधापार नाम का यह गांव बैंक जमा के मामले में दुनिया के सबसे अमीर गांवों में से एक है.करीब 7,600 घरों वाले मधापार गांव में 17 बैंक हैं.आप यह जानकर हैरानी हो जाएंगे कि इन सभी बैंकों में 92,000 लोगों के 5000 करोड़ रुपये जमा है.माधापार कच्छ के मिस्त्रियों द्वारा बसाए गए 18 गांवों में से एक है.गांव के बैंक में औसतन प्रति व्यक्ति जमा करीब 15 लाख रुपये है.कच्छ के मधापार के इन बैंकों के खाताधारक यूके, यूएसए, कनाडा समेत दुनिया के कई अन्य हिस्सों में रहते हैं.उन्होंने एक उदाहरण स्थापित किया है कि कैसे अपनी जड़ों से जुड़े रहना और उसे कभी नहीं भूलना, एक बड़ा बदलाव ला सकता है.17 बैंकों के अलावा, मधापार गांव में स्कूल, कॉलेज, झील, हरियाली, बांध, स्वास्थ्य केंद्र और मंदिर भी हैं। गांव में एक अत्याधुनिक गौशाला भी है.अब सवाल उठता है कि आखिर मधापार गांव भारत के पारंपरिक गांवों से इतना अलग क्यों है?

मधापार गांव के ज्यादा लोग NRI हैं.उन्होंने देश के बाहर रहकर काम किया और पैसे कमाकर गांव की तरक्की में योगदान किया यहां पैसा जमा किया.इसके बाद गांव में स्कूल, कॉलेज, स्वास्थ्य केंद्र, मंदिर, बांध, ग्रीनरी और झीलों का निर्माण कराया गया.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मदपार के करीब 65 फीसदी लोग एनआरआई हैं. इस बात का अंदाजा इस जानकारी से लगाया जा सकता है कि साल 1968 में लंदन में मदपार विलेज एसोसिएशन का गठन किया गया था. इसका गठन इसलिए हुआ था क्योंकि वहां काफी संख्या में मदपार के लोग रहते थे. एसोसिएशन का गठन उन सभी को एक-दूसरे से जुड़े रहने के लिए भी किया गया था. आज भी बड़ी संख्या में इस गांव के लोग विदेशों में रहते हैं और ये लोग अपने परिवार को मोटी रकम भेजते हैं. यही वजह है कि यहां के हर शख्स के अकाउंट में 15 लाख से अधिक रुपए हैं.

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